आमजान से खासजन को आक्रसित कर रहा है ‘आर्ट अड्ड़ा ’

आमजान से खासजन को आक्रसित कर रहा है ‘आर्ट अड्ड़ा ’

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वाधान में नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के ‘आर्ट अड्डा’ कार्यक्रम के तहत मशहूर चित्रकार अंजलि ईला मेनन के व्यक्तित्व और कृतित्व पर लिखी पुस्तक “थ्रू द पटीना” के हिंदी अनुवाद का विमोचन एनजीएमए के ऑडिटोरियम में शुक्रवार को संस्कृति प्रतिष्ठान के संस्थापक अध्यक्ष श्री ओ. पी. जैन के हाथों से किया गया।

गौरतलब है कि ‘आर्ट अड्डा’ एक सांस्कृतिक प्लेटफॉर्म है, जहां कला प्रेमी, कलाकारों, कला विशेषज्ञों, छात्रों और अध्यापक आपस में विचार-विमर्श करते हैं। यहां ज्ञान का आदान-प्रदान होता है और कला के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जाता है। नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट में ‘आर्ट अड्डा’ का आयोजन हर महीने के आखिरी शुक्रवार को किया जाता है।

इस अवसर पर मशहूर चित्रकार अंजोलि ईला मेनन ने कहा, “आज अपने पिक्टोरियल बायोग्राफी की रिलीज के समय जब मैं पीछे मुड़ कर देखती हूं तो अपनी जिंदगी के कई पड़ाव मेरी आंखों के सामने गुजरते हैं। मैं इस अवसर पर भावुकता से ओतप्रोत हूं।“

एनजीएमए के महानिदेशक श्री अद्वैत गणनायक ने कहा, “अंजोलि इला मेनन भारत की बेहतरीन समकालीन कलाकारों में से एक हैं। 2006 में कैलिफ़ोर्निया के ‘एशियन आर्ट म्यूजियम ऑफ सन फ्रांसिस्को’ ने उनकी एक महत्वपूर्ण रचना ‘यात्रा’ का अधिग्रहण किया। मै कला प्रेमियों से निवेदन करता हूँ की वो एनजीएमए के कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी रखे ”

मशहूर कला समालोचक और लेखक इशाना मूर्ति ने अंजोलि ईला मेनन के चित्रकार के रूप में 55 साल के कैरियर पर चित्रात्मक आत्मकथा लिखी है। उन्हें रक्षा मामलों के मशहूर विशेषज्ञ सी. उदय भास्कर ने भी इस चित्रात्मक आत्मकथा को लिखने में अपना सहयोग दिया है। “थ्रू द पटीना” में बताया गया कि आजकल जब आधुनिक कलाकार अपने चित्रों में विचारों को प्राथमिकता देते हैं, अंजोलि ईला मेनन की चित्रकारी लाक्षणिक, संवेदना से परिपूर्ण, रोमांटिक और व्यक्तिवादी हैं। वह एक प्रसिद्ध भित्ति चित्रकार भी हैं और कई समारोहों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

एला मेनन को बधाई देते हुए, एनजीएमए कि निर्देशक रितु शर्मा ने कहा, “मैं उनकी उपलब्धियों के लिए अंजोलि एला मेनन को बधाई देती हूं। वह निश्चित रूप से हमारे देश के बेहतरीन कलाकारों में से एक है। मुझे उम्मीद है कि यह पुस्तक का हिंदी अनुवाद बड़ी संख्या में बिकेगा तथा उनके कामो को अधिक से अधिक लोगों जानेगे और उनसे प्रोत्साहित होंगे ।

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